प्रेरणा स्रोत

श्री अतुल गर्ग निम्रविर्णित महानुभावों से प्रेरणा ग्रहण कर उनके विचारों मे विश्वास रखते हुये उनके पद चिन्हों को पथ प्रदर्शक मानते है ।



श्री अटलविहारी वाजपेयी

श्री अटलविहारी वाजपेयी एक मात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होने जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार भारत के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया श्री वाजपेयी ने प्रथम बार 16 मई से 31 मई 1996, दूसरी बार 19 मार्च 1998 से 13 मई2004 तक प्रधानमंत्री का पद सफलता पूर्वक सम्भाला तथा पहली गैर कांग्रेसी थी का नेतृत्व किया सरकार जिसने अपना कार्यकाल पूर्ण किया। श्री वाजपेयी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होने श्रीमती इन्दिरा गाँधी के बाद परमाणु परीक्षण किया तथा विश्व को सन्देश दिया कि हमारे परमाणु हथियार विशुद्ध रूप से निवारक हथियार हैं, जो केवल परमाणु शक्तियो के दुरूपयोग के रोकने के लिए हैं। उनका मानना है कि सशक्तराष्ट ही खुशहाल हो सकता है । इस कारण इन्होने परमाणु प्रयोग सन्धिं सी. टी.बी.टी का विरोध किया तथा "नो फ़स्ट यूज" के सिद्धान्त को प्रतिपादित किया । उनकी सरकार मे राष्ट्र निर्माण के तीनो क्षेत्र लोकतंत्र, विकास तथा सुरक्षा में बेहतरीन काम हुआ । 

प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना तथा सबसे बडे तथा सबसे तीव्र गति से राजमार्गो का निर्माण हुआ । स्वर्णिम चतुर्भुज योजना मे देश को जोडा तथा आर्थिक प्रगति हुई । किसानो को कर्ज 14-18% से घटाकर 9% पर मिलने लगा था । आर्थिक प्रगति दर उनकी सरकार मे 8% थी जो अब घटकर 5% है । पेट्रोल उत्पाद ,खाद्य सामग्री सभी उनकी सरकार मे आम आदमी को सहज तथा सस्ती उपलब्ध करायी । विनिवेश नितीकं से विकास को सहयोग मिला । कश्मीर पर इनकी सरकार में लाहौर बस सेवा तथा आगरा वार्ता हुई तथा कश्मीर में दो बाँधों बगलीहार तथा किशनगंगा पर काम शुरु हो सका । इनके शासन मे 73 लाख नये घर बने जिसमे 50 लाख ग्रामीण क्षेत्रों मे तथा 90 प्रतिशत गरीबों के लिए थे । 4 करोड़ एल.पी.जी. कनेकशन दिए गए,३ करोड़ फ़ोन कनेकशन तथा मोबाइल फ़ोन क्रांति उनके शासन में हुयी । 



श्री दिनेश चन्द्र गर्ग – एक व्यक्तित्व

श्री दिनेश चन्द्र गर्ग साहब पर बात करना मानवता पर बात करना है,..और कारवां बढ़ता जाता है.साथ ही रूह पर पडी धूल भी हटती जाती है.और व्यक्ति और भी निखर जाता है। गर्ग साहब के बिना गाज़ियाबाद का इतिहास पूर्ण नहीं हो सकता.आजादी के तुरंत बाद बटवारें की आग में जलते लोगों का गाज़ियाबाद आगमन,लोगों के भाईचारे की तमाम मिसालें अक्सर गर्ग साहब की सोहबत में सुनने को मिल जाती हैं। गर्ग साहब की कहानी एक आम आदमी के संघर्ष ,और सफल होने की कहानी है।अच्छे, ईमानदारी , क्रोध पर नियंत्रण ,और सबको साथ लेकर चलना ,जैसी बातें जहाँ आज के युग में मिथक लगती हैं,वही गर्ग साहब ने ताउम्र इनका पालन किया और ये साबित किया कि जनसेवा ही एक ऐसा मार्ग है,जो आपको सच्ची ख़ुशी प्रदान कर सकता है। 

श्री दिनेश चन्द्र गर्ग को गाज़ियाबाद का प्रथम CA बनने का गौरव प्राप्त है.इन्होने अपना प्रकाशन शुरू किया ,जिससे आज भी किताबों का सतत प्रकाशन ज़ारी है।आगे चलकर गर्ग साहब गाज़ियाबाद के मेयर बने,और यहाँ जो सुधारों का दौर शुरू हुआ, वह पार्कों ,स्कूल, कालेजों ,और गाज़ियाबाद के समग्र विकास की गाथा है। गर्ग साहब का व्यक्तिव अनायास ही अपनी और आकर्षित कर लेता है.इन्होने अपनी पूरी ज़िन्दगी में कभी क्रोध नहीं किया। 



पन्डित दीनदयाल उपाध्याय

पन्डित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म मथुरा जिले के नगलाचन्द्रभान ग्राम, धार्मिक क्षेत्र बृज मे 25 सितम्बर 1916 दिन सोमवार को हुआ था। उनके पिता जी एक प्रख्यात ज्योतिषी थे। जिन्होनें पन्डित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म कुण्डली को देखकर उन्होने भविष्यवाणी की थी कि ये बच्चा एक महान विचारक और विद्वान बनेगा। उन्होंने ये भी कहा था कि ये लडका एक निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाला और महान राजनीतिज्ञ बनेगा लेकिन विवाह् नही करेगा। 

पन्डित दीनदयाल उपाध्याय उन आदर्श महापुरूषों में से थे जिन्होन शंकराचार्य, ब्रहस्पत और चाणक्य से प्रेरणा ली थी कि आधुनिक राजनीति को किस तरह से शुध्द्धता और मानवता की नीव पर खडा किया जा सकता है। वो महान विचारक, बुद्धिमान और प्रतिभाशाली व्यकित थे। वे तत्कालीन भारतीय जनसंघ के चार बार महासचिव रहकर अन्त मे अध्यक्ष पद तक पहुँचे। परन्तु वे हमेशा ही दलीय राजनीति और सत्ता की राजनीति से दूर रहे। पन्डित जी ने सदैव यह प्रयास किया कि किस तरह से राजनीतिक दर्शन शास्त्र को राष्ट्र के अन्दर भारत की परम्पराओ के अनुसार ढाला जाए जो कि सम्पूर्ण मानवता तथा राष्ट्र को शानदार उपलबिधयों की ओर ले जा सके। इससे देश के नागरिकों का सम्पूर्ण विकास एवं व्यकितत्व का विकास करने मे सहायता मिलेगी।

उनका मानना था कि लोकतंत्र राजनैतिक नहीं अपितु सामाजिक व आर्थिक क्षेत्रो में भी होना चाहिए । सहिष्ढुता, प्रतिष्ठा व समाज के साथ एकात्मता लोकतंत्र के प्राण है ।पंडित जी ने सदैव यह प्रयास किया कि इस तरह की राजनैतिक शास्त्र विकसित किया जाये जो की भारत की परम्पराओं तथा प्रकृति के अनुकूल हो जिससे राष्ट्र की चहुमुखी विकास हो सके ।ज्ञान तथा हमारी विरासत के आधार पर हम ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जिसमे प्रत्येक नागरिक को उनकी अविकसित सामर्थ्य को कई गुना विकसित करने का अवसर मिले, नागरिक संपूर्ण समाज का हिस्सा महसूस करे जिससे नागरिक पूर्णता को प्राप्त करता हुआ नर से नारायण हो सके ।