गाजियाबाद में मेट्रो सेस खत्म करने की तैयारी


गाजियाबाद : जीडीए की तरफ से लगाए जा रहे मेट्रो सेस को खत्म किया जा सकता है। इसके लिए खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने पैरवी की है। उनका कहना है कि ऐसे सभी भवनों पर मेट्रो सेस नहीं लेना चाहिए, जिनकी आय का कोई साधन न हो और भविष्य में भी ऐसे किसी साधन की उम्मीद न हो। शासन ने राज्यमंत्री की बात को गंभीरता से लेते हुए जीडीए को पत्र लिखकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अथॉरिटी एक-दो दिन पब्लिक का होगा फायदा

क्रेडाई राजनगर एक्सटेंशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि मेट्रो सेस खत्म हो जाता है तो इसका सीधा फायदा पब्लिक को मिलेगा। मेट्रो सेस का जो भार अभी बिल्डरों पर पड़ रहा है, उसकी वसूली पब्लिक को फ्लैट बेचकर होती है। सेस खत्म होने से फ्लैट सस्ते हो जाएंगे। क्रेडाई के पदाधिकारी गौरव गुप्ता के मुताबिक, इस फैसले से उनको भी फायदा होगा जो अपना खुद का घर बनाकर रह रहे हैं। भविष्य में नक्शे में परिवर्तन के लिए आवेदन करने पर जीडीए उनसे मेट्रो सेस नहीं लेगा।

इस तरह होगा फायदा
फ्लैट एरिया बचत
1 बीएसके 500 30000
2 बीएचके 1000 60000
3 बीएचके 1500 90000
(बचत रुपये में अनुमान के आधार पर, एरिया वर्गमीटर में)

इस रूट पर भी पड़ेगा असर

अभी दिलशाद गार्डन से लेकर नया बस अड्डा वाले रूट पर दोनों तरफ 500-500 मीटर पर मेट्रो सेस लगाया जा रहा है। इससे शहीदनगर, राजबाग, राजेंद्र नगर, श्यामपार्क, मोहन नगर, अर्थला, हिंडन रिवर और न्यू बस अड्डा एरिया के किनारे जीडीए की योजनाओं का सीधा फायदा पब्लिक को मिलेगा। इसके अलावा यदि कोई प्राइवेट बिल्डर इस रूट के 500-500 मीटर में किसी सोसायटी का निर्माण करता है तो उसे भी मेट्रो सेस नहीं देना पड़ेगा। इसके अलावा वैशाली से मोहन नगर और नोएडा सेक्टर-62 से साहिबाबाद के रूट पर भी इसका फायदा मिलेगा। हालांकि यह प्रस्ताव केवल गाजियाबाद के लिए है। नोएडा में यह लागू नहीं होगा।

प्रस्ताव के पक्ष में नहीं जीडीए

जीडीए इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है। मेट्रो सेस खत्म करने का मतलब है कि आय का जरिया खत्म करना। दरअसल मेट्रो परियोजना के लिए अथॉरिटी ने 600 करोड़ रुपये से अधिक का अंशदान दिया है। इस रकम की वसूली होने तक सेस खत्म करना ठीक नहीं होगा। वैसे अधिकारियों का यह भी कहना है कि सेस पर अंतिम फैसला शासन को करना है।

इस तरह कैलकुलेट होता है मेट्रो सेस

2012 और 2013 के सर्कल रेट में जो अंतर होता है, उसका 15 प्रतिशत मेट्रो सेस लिया जाता है। हर एरिया का सर्कल रेट अलग होता है। ऐसे में मेट्रो सेस भी बदलता रहता है।

शासन की तरफ से मेट्रो सेस के नाम से सभी भवनों के मानचित्र पर लगने वाले शुल्क में छूट के संबंध में पत्र आया है। इसमें जीडीए नियमानुसार परीक्षण करके अपनी रिपोर्ट देगा। फिर इस पर अंतिम फैसला शासन की तरफ से किया जाएगा। बोर्ड की अनुमति के बाद ही मेट्रो सेस लगाया गया है। - इश्तियाक अहमद, सीएटीपी, जीडीए

मेट्रो सेस से छूट देने के लिए शासन को पत्र लिखा है। पूरे गाजियाबाद के लोग इस समस्या को झेल रहे हैं। जल्द ही इस मामले को लेकर साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की जाएगी। अभी हमारा फोकस नॉन कमर्शल एक्टिविटी पर मेट्रो सेस खत्म कराने पर है। इसके बाद दूसरी एक्टिविटी पर विचार किया जाएगा। -अतुल गर्ग, राज्यमंत्री